Mar 30, 02:39 am
बरेली। अप्रैल आने में सिर्फ दो दिन बाकी हैं। पिछले रिकार्ड के मुताबिक अग्निकांड के लिहाज से अप्रैल माह सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जाता है। गर्मी की धमक शुरू हो गई। पांच-दस दिनों में लू भी चलने लगेगी। खेतों में फसलें तैयार खड़ी हैं। ऐसे में आग की एक चिनगारी भी किसान की पूरी फसल तबाह कर सकती है। ऐसा पिछले वर्षो में होता रहा है। किसान को इस तबाही से बचाने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं। यानि आग लगी तो बुझेगी भगवान भरोसे ही।
आजादी के बाद जनसंख्या तो कई गुना बढ़ गई, लेकिन आग बुझाने के मानक अभी वही हैं। उस हिसाब से भी साधनों का खासा अभाव हैं।
मानक के अनुसार पांच किमी की परिधि में एक फायर स्टेशन होना चाहिए। मगर जिले भर में केवल तीन अग्निशमन केन्द्र हैं, जिनमें शहर भी शामिल है। शहर के सिविल लाइन स्थित फायर स्टेशन पर तीन गाड़िया हैं। फरीदपुर व बहेड़ी फायर स्टेशन पर सिर्फ एक-एक गाड़ी है। शासन स्तर से परसाखेड़ा अग्निशमन केन्द्र स्वीकृत कर दिया गया है, लेकिन उसे शुरू होने में कई महीनें लग जायेंगे। आंवला व फरीदपुर तहसील में फायर स्टेशन खोलने के लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है, लेकिन स्वीकृति कब मिलेगी इसका पता नहीं। मानक के मुताबिक जिले में तीन अग्निशमन अधिकारी होने चाहिए, जिनमें केवल एक तैनात है। अग्निशमन द्वित अधिकारी पांच की जगह दो ही हैं। फायरमैन आठ कम हैं।
सीएफओ अजय कुमार ने बताया कि मार्च, अप्रैल, मई और जून में आग की घटनायें अधिक होती हैं। पिछले साल अप्रैल में 68, मई 41 व जून में 33 आग लगने की घटनायें हुई। इन दिनों अधिकतर आग खेतों में खड़ी फसलों में लगती है। इसके मद्देनजर लोकल स्तर पर इंतजाम कर लिए गये हैं। नवाबगंज व आंवला थाने में एक-एक फायर जीप व डीजल पम्प की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक जगह एक लीडिंग अफसर व दो कर्मचारी तैनात किये गये हैं। इसके अलावा थाना स्तर से भी मदद ले ली जाती है। सिनेमा हाल व पम्पलेट आदि के माध्यम से आग की घटनाओं संबंधी प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
बावजूद इसके आग के कहर से बच पाना मुश्किल है। मीरगंज तहसील शहर से करीब 30 किमी दूर है। वहां आग बुझाने का कोई भी साधन नहीं। आंवला भी करीब 40 किमी दूर है। ऐसे में कहीं आग लगती है तो वक्त पर फायर ब्रिगेड पहुंच पाना मुश्किल होगा। साभार जागरण पोर्टल.
Sunday, March 30, 2008
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