Monday, March 31, 2008

14 से हो सकती है बीएड की तीसरी काउंसलिंग

Apr 01, 02:15 am
बरेली। मेरिट में आने के बावजूद बीएड में प्रवेश न पा सकने वाले छात्रों के लिए एक अच्छी खबर है। कानपुर यूनिवर्सिटी जल्द ही बीएड की तीसरे चरण की काउंसलिंग कराने जा रही है। इसके लिए विवि ने उन सभी कालेजों का ब्यौरा मांगा है, जहां किसी कारणवश अब तक प्रवेश नहीं हो सके हैं।
बीएड की तीसरे चरण की काउंसलिंग 14 अप्रैल से होने की संभावना है। पिछली दोनों काउंसलिंग में विश्वविद्यालयों से कालेजों की सूची मांगने के बाद अब कानपुर विवि से बीएड कालेजों से सीधे संपर्क साधा है। विवि के संबद्धता अधीक्षक एससी मित्तल ने बताया- कानपुर विवि से उन सभी कालेजों की सूची मांगी है जहां सत्र पूरा न हो सकने या किसी और वजह से मान्यता लंबित होने के कारण प्रवेश नहीं हो पाये हैं। कानपुर विवि ने ऐसे सभी कालेजों से चार अप्रैल से पहले संपर्क साधने को कहा है। दूसरी ओर दूसरे चरण की काउंसलिंग की अंतिम तिथि दो अप्रैल घोषित कर दी गई है। श्री मित्तल ने बताया : कानपुर विवि ने हमें अभी तीसरे चरण की काउंसलिंग के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है, लेकिन जिस स्तर पर तैयारियां हो रही हैं उससे लगता है कि विवि जल्द से जल्द इस काम को निपटाना चाहता है। साभार
जागरण पोर्टल

अब एमएड में एडमीशन के लिए भी प्रवेश परीक्षा

Apr 01, 02:15 am
बरेली। अब बीएड में हासिल की गई ऊंची मेरिट एमएड में दाखिले का मापदंड नहीं बन पाएगी। राजभवन ने अगले सत्र से एमएड में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा देना अनिवार्य कर दी है। यह फैसला उन मेधावी विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है जो बीएड में ऊंची मेरिट नहीं होने के कारण प्रवेश से वंचित रह जाते हैं। रुहेलखंड विवि भी अगले सत्र में एमएड में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा करायेगा।
बीएड में अच्छे अंक हासिल करके एमएड में प्रवेश पा जाने वाले छात्रों की राह विश्वविद्यालय ने मुश्किल कर दी है। आमतौर पर देखा जाता था कि स्वत्तिपोषित कालेजों के छात्र-छात्राएं सरकारी कालेजों के छात्र-छात्राओं से बहुत अधिक नंबर ले आते हैं। मेरिट कम होने के कारण मेधावी छात्र-छात्राओं को भी प्रवेश से वंचित रहना पड़ता है। प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से मिली ऐसी तमाम शिकायतों के बाद राजभवन ने अगले सत्र से अनिवार्य रूप से प्रवेश परीक्षा कराने के आदेश दिये हैं। राजभवन के आदेश का अनुपालन सुनिश्चत करने के लिए कुलपति ने कुछ दिन पहले विभिन्न कालेजों के प्राचार्यो की बैठक बुलाई थी। एक अरसे से एमएड में प्रवेश परीक्षा करवाने के लिए प्रयासरत हिंदू कालेज के प्राचार्य डा. एसएन सिंह ने बताया : विवि प्रशासन ने प्रवेश परीक्षा के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। प्रवेश परीक्षा होने से केवल उन्हीं छात्रों को प्रवेश मिलेगा जो वास्तव में एमएड करने की योग्यता रखते हैं। साभार
जागरण पोर्टल

चालीस रुपये किलो हुआ पोदीना, पचास फीसदी महंगी हुई थाली

Apr 01, 02:15 am
बरेली। बढ़ती महंगाई ने जिंदगी के सफर को मुश्किल कर दिया है। महिलाओं की चौपाल हो, गली का चौराहा या तमाम सुविधाओं से सुसज्जित आफिस। हर तरफ कुछ समय महंगाई के असर पर चरचा में गुजर रहा है। जाहिर है कि अब इस महंगाई ने लोगों को तेजी से प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
समय के साथ कहावत का मतलब भी बदलना पड़ जाता है। क्या आज कोई किसी को कह सकता है-मेरे सामने क्या पोदीना बेचते हो? जनाब पोदीना चालीस रुपये किलो मिल रहा बाजार में। महंगाई ने कमर नहीं मानो आम आदमी की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी है। घर की थाली पचास फीसदी तक महंगी हो चुकी है। निम्न तबके में कुपोषण और भी बढ़ रहा है। मध्यम वर्ग के खाने की क्वालिटी भी दिन ब दिन घट रही है। दूध, दही और फल अब अमीरों या फिर मध्यवर्ग में बहुत छोटे बच्चों के लिए रह गये मालूम पड़ते हैं।
चंद साल ही हुए जब 15 हजार रुपये वेतन पाने वाला 'लग्जीरियस' जिंदगी जी रहा था अब उतना ही वेतन पाने वाला जिंदगी गुजार रहा है। क्या इतना वेतन पाने वाला घर बनाने का सपना देख सकता है.शायद नहीं.। उसके सामने तमाम दुश्वारियां, चिंताएं हैं। बेटी की शादी कैसे होगी..बेटे को इंजीनियरिंग में दाखिला कैसे दिला पाएंगे। चिंता की वजह जायज है क्योंकि बढ़ती महंगाई ने वेतन को सिर्फ खाने पीने तक ही सीमित कर दिया है वह भी बहुत अच्छा नहीं। पहले जहां महंगाई का असर सालों में दिखती थी वहीं अब सप्ताह में महंगाई के आंकड़े देखे जा सकते हैं। खाद्य तेल हो या आटा-चावल, फल हो या सब्जी यहां तक की दूध भी अब 24 रुपये किलो तक बिक रहा है। अब तो बस सभी की जुबान पर एक ही दुआ है..महंगाई कम हो।
आसमान छूती महंगाई
उत्पाद मूल्य सिंतबर 07 मार्च 08
खाद्य तेल 55-60 70
आटा 13-15 13-15
दाल :-
मसूर 35-40 40-45
उड़द 25-32 32-38
चना 28-32 35-38
मलका 35-40 42-45
सब्जी :-
तोरई 20-30 30-32
करेला 25 30-40
लहसुन 20 30
परवल 22-25 32
लौकी 6-7 10-12
हरा धनिया 12 40
खीरा 8 14
पोदीना 20 40
फल :-
सेब 45 60
अनार 35-40 50
अंगूर 25 40
संतरा 25 40
केला 15 25
मांस :-
चिकन 60-70 90
मटन 130-140 160-170
मछली 130-170 150-200
चाय :-
ब्रांडेड चाय 95-150 110-160
खुली चाय 60-70 100
दूध 18-20 22-25

साभार जागरण पोर्टल

ग्रेजुएशन: अब सिर्फ किताबी ज्ञान से नहीं चलेगा काम

Apr 01, 02:15 am
बरेली। ग्रेजुएशन में अब सिर्फ किताबी ज्ञान से काम नहीं चलेगा। इसके लिए छात्र-छात्राओं को अतिरिक्त पढ़ाई भी करनी होगी। प्रदेश सरकार के आदेश पर पर्यावरण व शारीरिक शिक्षा को अनिवार्य करने के बाद अब विवि प्रशासन पाठ्यक्रम में तीन और विषय शामिल करने जा रहा है। मानवाधिकार, सांप्रदायिक सौहार्द और राष्ट्रीय गौरव। खास बात यह है कि छात्र को पास होने के लिए मुख्य विषयों के साथ-साथ इन पांच विषयों की परीक्षा भी अनिवार्य रूप से पास करनी होगी। कुलपति ने तीन नये विषयों का पाठ्यक्रम तय करने के लिए 12 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। समिति को 25 अप्रैल को विवि में होने जा रही बैठक में अपनी सिफारिशें रखनी होंगी।
प्रदेश सरकार ने पिछले सत्र में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को पर्यावरण व शारीरिक शिक्षा को अनिवार्य रूप से लागू करने के आदेश दिये गये थे। विश्वविद्यालयों ने दोनों विषयों को क्वालीफाइंग पेपर के रूप में शामिल कर लिया था। अब शासन ने तीन और विषयों को स्नातक कक्षाओं में अनिवार्य रूप से लागू करने को कहा है। सांप्रदायिक सौहार्द, राष्ट्रीय गौरव व मानवाधिकार भी अगले सत्र से पाठ्यक्रम में शामिल हो जायेंगे। खास बात यह है कि इसके लिए विवि का कालेज में अलग से पढ़ाई नहीं करवाई जायेगी। छात्र को खुद ही इन विषयों को तैयार करना होगा, अंकतालिका पर इनके नंबर भी नहीं चढ़ाये जायेंगे, लेकिन फेल होने पर छात्र को अंकतालिका नहीं दी जायेगी। तीनों ंिवषयों का पाठ्यक्रम तय करने के लिए कुलपति प्रो. ओमप्रकाश ने 12 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है।
कमेटी के सदस्य व हिंदू कालेज के प्राचार्य डा. एसएन सिंह ने बताया: विवि ने ये तीन पाठ्यक्रम सरकार और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शुरू किये हैं। हमने विवि प्रशासन को पांचों विषयों का एक ही पेपर कराने का सुझाव दिया है। सौ नंबर के इस प्रश्नपत्र में सभी विषयों के बीस-बीस सवाल होंगे। सभी सवाल बहुविकल्पीय होगे। इसमें छात्र को ओएमआर शीट दी जायेगी। सभी विषयों का पाठ्यक्रम 25 अप्रैल को विवि में होने जा रही बैठक में तय किया जायेगा। साभार जागरण पोर्टल

Sunday, March 30, 2008

अब आसान नहीं होगा बीएड कालेज खोलना

बरेली। प्रदेश में तेजी से खुल रहे बीएड कालेजों पर शासन ने लगाम कस दी है। अब किसी भी कालेज को पांच साल से पहले बीएड चलाने की अनुमति नहीं दी जायेगी। इसके साथ ही एकल बीएड कालेज खोलने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।

प्रदेश के सभी लॉ कालेजों को लखनऊ स्थित डा. राममनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय से जोड़ने के फैसले के बाद शासन ने बीएड कालेजों पर भी लगाम कस दी है। युवाओं में एजुकेशन के क्रेज को देखते हुए इस समय बड़ी संख्या में बीएड कालेज खुल रहे हैं। अकेले रुहेलखंड विवि परिक्षेत्र में इस समय 41 बीएड कालेज हैै।

तेजी से खुल रहे निजी बीएड कालेजों व कालेज प्रबंधनों से छात्रों के उत्पीड़न की तमाम शिकायतें मिलने के बाद शासन ने इन कालेजों की मान्यता के लिए कड़े दिशा निर्देश जारी कर दिये हैं। अब बीएड की मान्यता लेने से पहले किसी भी कालेज को बीएससी, एमएससी व बीकॉम में से किसी दो में दो बैच पास आउट करवाना जरूरी होगा। यानि कालेज को बीएससी-बीकॉम, बीए-बीकॉम व बीए-बीएससी में पांच साल अनिवार्य रूप से पढ़ाई करवानी होगी। पांच साल से पहले शासन किसी भी कालेज को एनओसी नहीं देगा। शासन ने एकल बीएड कालेज खोलने पर भी रोक लगा दी है। रुहेलखंड विवि के संबद्धता अधीक्षक एससी मित्तल ने बताया: ऐसा आदेश पिछली सरकार में भी जारी किया गया था, इस सरकार ने इसमें कुछ संशोधन करते हुए इसे सख्ती से लागू करने के आदेश दिये हैं। साभार जागरण पोर्टल.

डाक्टरों और रामदेव में कोई झगड़ा नहीं

Mar 29, 02:29 am
बरेली। योग गुरू बाबा रामदेव आज देसी और विदेशी चिकित्सा पद्धति के झगडे़ को खत्म करने के मूड में नजर आये। रुहेलखंड मेडिकल कालेज का उद्घाटन करने आये बाबा रामदेव ने भावी डाक्टरों की एक घंटे क्लास ली और योग के फंडे समझाए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ्य समाज की स्थापना के लिये देसी और विदेशी चिकित्सा पद्धतियों का मिलन होना चाहिए।
हजारों छात्रों और अतिथियों से भरे पंडाल में बाबा रामदेव ने जैसे ही बोलना शुरू किया शांति छा गई। चिकित्सा विज्ञान के मूल तत्वों का विश्लेषण करते हुए स्वामी जी ने जहां विदेशी चिकित्सा पद्धति की उपयोगिता को बताया, वहीं बड़ी साफगोई से यह सिद्ध करने की कोशिश की कि योग इन सबमें ऊपर है। उन्होंने कहा कि सभ्य समाज अब इस तथ्य को स्वीकार कर रहा है कि डाक्टर और रामदेव एक दूसरे के विरोधी नहीं।
प्रारंभिक रोकथाम को चिकित्सा विज्ञान का पहला तत्व बताते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि बीमारियां न हों इसको रोकने का उपाय मेडिकल साइंस में नहीं। पोलियो जैसी बीमारी से बचाव के लिये जरूर दवा खोजी गई है। जबकि प्राणायाम सही ढंग से करने वाला निरोगी रहता है यह साबित हो चुका है।
सेकेंडरी प्रीवेंशन पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि विदेशी चिकित्सा में कैंसर सरीखे रोगों को दोबारा होने से नहीं रोका जा सकता लेकिन योग से कैंसर को क्योर किया जा सकता है। स्वामी जी ने कहा कि रोगों के एक्यूट मैनेजमेंट में एलोपैथी का कोई तोड़ नहीं, और न ही उसको लेकर कोई मतभेद है। जीवन रक्षा प्रणाली में माडर्न मेडिसिन बेस्ट है, लेकिन यह पद्धति मर्ज को मेंटेन करती है जबकि योग क्योर करता है।
दो करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष रूप से योग की शिक्षा देने का दावा करते हुए स्वामी जी ने कहा कि मैंने योग में कुछ नया नहीं किया, बल्कि प्रयोग किया और उसके परिणाम सामने आते गये जो प्रमाण हो गये। तनाव को सभी बीमारियों का कारण बताते हुए स्वामी रामदेव ने बताया कि एसजीपीजीआई लखनऊ केसाथ मिलकर उन्होंने शोध किया। नौ दिनों तक चले इस शोध में पाया गया कि योग से तनाव पैदा करने वाले हारमोन्स खत्म हो गये।
एड्स, इनफर्टिलिटी और अन्य बीमारियों की चर्चा करते हुए स्वामी जी ने कहा कि सात प्राणायाम शरीर के सभी अंगों को गतिशील करने में सहायक होते हैं। जब यह अंग पूरी क्षमता के साथ काम करने लगते हैं तो स्वस्थ शरीर का विकास होता है। स्वामी जी ने कहा कि पातांजलि योग पीठ में शोध के सभी संसाधन उपलब्ध कराये जा रहे हैं और उसके बाद भारतीय बच्चों को शोध के लिये विदेश नहीं जाना पडे़गा। विज्ञान का तिरस्कार नहीं बल्कि उसका सत्कार करना चाहिए। विरोध के स्वर भूलकर संवाद, समन्वय और समाधान की ओर आगे बढ़ना चाहिए। आरोग्य मानव मात्र का मौलिक अधिकार है और वह योग के माध्यम से पाया जा सकता है। भारत को विश्व शक्ति बनाने की दिशा में मेरी मुहिम जारी है, जिसमें सफलता मिल रही है। करोड़ों लोग सुबह पांच बजे उठकर बीमारी के खिलाफ जंग लड़ रहे है।
इससे पूर्व स्वामी रामदेव ने रुहेलखंड मेडिकल कालेज का उद्घाटन किया। कालेज के चेयरमैन डा. केशव कुमार ने कहा कि स्वामी जी के आगमन ने कालेज के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है। प्राचार्य डा. कशमीर सिंह ने बताया कि डेंटल कालेज का पहला बैच इसी साल पास-आउट हुआ है। अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने भी विचार रखे। भारतीय दंत चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डा. अनिल कोहली, डा. किरन अग्रवाल, डा. लता अग्रवाल, सर्वेश अग्रवाल, गौरव अग्रवाल, कुलपति ओम प्रकाश आदि ने स्वामी जी का स्वागत किया। साभार
जागरण पोर्टल.

इस बार जमा नहीं करनी पड़ेगी मई-जून की फीस

Mar 30, 02:39 am
बरेली। अगर आपके बच्चे पब्लिक स्कूलों में पढ़ रहे हैं तो यह खबर निश्चित रूप से आपकी जेब के लिए राहत लेकर आई है। इस बार कोई भी स्कूल अभिभावकों से मई और जून के महीने की फीस नहीं वसूल पायेगा। इस मामले में पब्लिक स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए दो-दो अभिभावक संघ मैदान में उतर आये हैं।
प्रदेश भर में पब्लिक स्कूलों की तमाम शिकायतें मिलने के बाद शासन ने पिछले साल किसी भी शिक्षण संस्था के एक महीने या इससे अधिक अवधि तक बंद रहने की स्थिति में फीस वसूले जाने पर रोक लगा दी थी। शासन ने स्पष्ट कहा था कि स्कूल तिमाही या छमाही पैटर्न में फीस नहीं वसूलेंगे। जिन कंधों पर इस आदेश को सख्ती से लागू करवाने की जिम्मेदारी थी, उनकी ढिलाई के चलते इस पर अमल नहीं हो पाया। इसका नतीजा यह है कि अधिकांश स्कूल आदेश जारी होने के एक साल बाद भी तिमाही पैटर्न में ही फीस वसूल रहे हैं।
हालांकि शासन ने ये आदेश पिछले सत्र में ही जारी कर दिये थे लेकिन तब तक अधिकांश स्कूल फीस वसूल चुके थे। पेरेंट्स वेल्फेयर एसोसिएशन के देवेन्द्र जोशी व राजेश साहनी ने कहा- अधिकांश स्कूल अप्रैल में ही अप्रैल, मई व जून की फीस जमा करवा लेते हैं। इस बार हम मई व जून की फीस जमा नहीं होने देंगे। शहनाई बारातघर में हुई एसोसिएशन की बैठक में उत्पीड़न के खिलाफ अभियान छेड़ने का फैसला किया गया।
इधर जिला अभिभावक संघ के संरक्षक अमजद सलीम ने कहा है कि उनका संगठन किसी भी कीमत पर स्कूलों में कापी किताबों के स्टाल नहीं लगने देगा। स्कूलों में स्टाल लगने की सूचना मिलने पर उनका संगठन छापा मारेगा। स्कूल प्रबंधन व पुस्तक विक्रेता की शिकायत शासन और प्रशासन से की जायेगी। साभार
जागरण पोर्टल.