Wednesday, March 26, 2008

मौजूदा बीआरसी व एनपीआरसी समन्वयकों की होगी छुट्टी

बरेली। सर्व शिक्षा अभियान के मौजूदा सभी बीआरसी समन्वयकों और एनपीआरसी प्रभारियों को अब दुबारा इस पद पर कार्य करने का मौका नहीं मिलेगा। मई में उनकी छुट्टी हो जाएगी और उन्हें अपने विद्यालय में जाकर फिर पढ़ाना होगा। सभी बीआरसी समन्वयकों और एनपीआरसी प्रभारियों के नए चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

यहां बता दें कि जिले में सर्व शिक्षा अभियान का क्रियान्वयन ब्लाक स्तर पर बनाए गए ब्लाक संसाधन केन्द्र (बीआरसी) और न्याय पंचायत स्तर पर बनाए गए न्याय पंचायत संसाधन केन्द्र (एनपीआरसी) के माध्यम से होता है। बीआरसी के समन्वयक ब्लाक में और एनपीआरसी प्रभारी न्याय पंचायत में अभियान के क्रियाकलापों का क्रियान्वयन कराते हैं। बीआरसी पर समन्वयक और सह समन्वयक होते हैं जबकि एनपीआरसी केन्द्र पर सिर्फ प्रभारी होता है। इन पदों के लिए परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक ही चयनित किए जाते हैं। वैसे, पहले से ही शासनादेश है कि समन्वयक व प्रभारी पदों पर एक बार कार्य कर चुके शिक्षक को दोबारा मौका नहीं दिया जाएगा लेकिन पिछले वर्ष विशेष अनुमति लेकर कई शिक्षकों को दुबारा समन्वयक बनने का मौका दे दिया गया था।

गौरतलब है कि सर्व शिक्षा अभियान के विभिन्न कार्यो के लिए खासा बजट आता है। ऐसे में कई परिषदीय शिक्षक समन्वयक बनने के लिए आतुर रहते हैं। समन्वयक बनने पर उन्हें अपने स्कूल में अध्यापन कार्य से छुटकारा मिल जाता है। चयन प्रक्रिया के अनुसार, बीएसए आवेदन आमंत्रित करते हैं और डायट प्राचार्य चयन प्रक्रिया पूरी कराती हैं। चयन बाकायदा डायट प्राचार्य की अध्यक्षता वाली एक कमेटी करती है। इनका चयन दो वर्ष के लिए होता है, अब तक कार्य कर रहे समन्वयकों व प्रभारियों का कार्यकाल जून में पूरा हो रहा है। ऐसे में बीएसए उनके चयन की प्रक्रिया अभी से शुरू कर दी है। सर्व शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक प्रशिक्षण डा। अवनीश यादव ने बताया कि इस बार चयन शासनादेश के अनुसार ही किया जाएगा, ऐसे में मौजूदा समन्वयकों व प्रभारियों के आवेदनपत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे। 15 दिन में आवेदनपत्र मांग कर उन्हें डायट प्राचार्य के पास भेज दिया जाएगा। चयन के लिए आवेदनकर्ता शिक्षकों का बाकायदा लिखित व मौखिक इंटरव्यू होता है। साभार जागरण पोर्टल

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