बरेली। प्रदेश में तेजी से खुल रहे बीएड कालेजों पर शासन ने लगाम कस दी है। अब किसी भी कालेज को पांच साल से पहले बीएड चलाने की अनुमति नहीं दी जायेगी। इसके साथ ही एकल बीएड कालेज खोलने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
प्रदेश के सभी लॉ कालेजों को लखनऊ स्थित डा. राममनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय से जोड़ने के फैसले के बाद शासन ने बीएड कालेजों पर भी लगाम कस दी है। युवाओं में एजुकेशन के क्रेज को देखते हुए इस समय बड़ी संख्या में बीएड कालेज खुल रहे हैं। अकेले रुहेलखंड विवि परिक्षेत्र में इस समय 41 बीएड कालेज हैै।
तेजी से खुल रहे निजी बीएड कालेजों व कालेज प्रबंधनों से छात्रों के उत्पीड़न की तमाम शिकायतें मिलने के बाद शासन ने इन कालेजों की मान्यता के लिए कड़े दिशा निर्देश जारी कर दिये हैं। अब बीएड की मान्यता लेने से पहले किसी भी कालेज को बीएससी, एमएससी व बीकॉम में से किसी दो में दो बैच पास आउट करवाना जरूरी होगा। यानि कालेज को बीएससी-बीकॉम, बीए-बीकॉम व बीए-बीएससी में पांच साल अनिवार्य रूप से पढ़ाई करवानी होगी। पांच साल से पहले शासन किसी भी कालेज को एनओसी नहीं देगा। शासन ने एकल बीएड कालेज खोलने पर भी रोक लगा दी है। रुहेलखंड विवि के संबद्धता अधीक्षक एससी मित्तल ने बताया: ऐसा आदेश पिछली सरकार में भी जारी किया गया था, इस सरकार ने इसमें कुछ संशोधन करते हुए इसे सख्ती से लागू करने के आदेश दिये हैं। साभार जागरण पोर्टल.
Sunday, March 30, 2008
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