Sunday, March 30, 2008

डाक्टरों और रामदेव में कोई झगड़ा नहीं

Mar 29, 02:29 am
बरेली। योग गुरू बाबा रामदेव आज देसी और विदेशी चिकित्सा पद्धति के झगडे़ को खत्म करने के मूड में नजर आये। रुहेलखंड मेडिकल कालेज का उद्घाटन करने आये बाबा रामदेव ने भावी डाक्टरों की एक घंटे क्लास ली और योग के फंडे समझाए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ्य समाज की स्थापना के लिये देसी और विदेशी चिकित्सा पद्धतियों का मिलन होना चाहिए।
हजारों छात्रों और अतिथियों से भरे पंडाल में बाबा रामदेव ने जैसे ही बोलना शुरू किया शांति छा गई। चिकित्सा विज्ञान के मूल तत्वों का विश्लेषण करते हुए स्वामी जी ने जहां विदेशी चिकित्सा पद्धति की उपयोगिता को बताया, वहीं बड़ी साफगोई से यह सिद्ध करने की कोशिश की कि योग इन सबमें ऊपर है। उन्होंने कहा कि सभ्य समाज अब इस तथ्य को स्वीकार कर रहा है कि डाक्टर और रामदेव एक दूसरे के विरोधी नहीं।
प्रारंभिक रोकथाम को चिकित्सा विज्ञान का पहला तत्व बताते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि बीमारियां न हों इसको रोकने का उपाय मेडिकल साइंस में नहीं। पोलियो जैसी बीमारी से बचाव के लिये जरूर दवा खोजी गई है। जबकि प्राणायाम सही ढंग से करने वाला निरोगी रहता है यह साबित हो चुका है।
सेकेंडरी प्रीवेंशन पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि विदेशी चिकित्सा में कैंसर सरीखे रोगों को दोबारा होने से नहीं रोका जा सकता लेकिन योग से कैंसर को क्योर किया जा सकता है। स्वामी जी ने कहा कि रोगों के एक्यूट मैनेजमेंट में एलोपैथी का कोई तोड़ नहीं, और न ही उसको लेकर कोई मतभेद है। जीवन रक्षा प्रणाली में माडर्न मेडिसिन बेस्ट है, लेकिन यह पद्धति मर्ज को मेंटेन करती है जबकि योग क्योर करता है।
दो करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष रूप से योग की शिक्षा देने का दावा करते हुए स्वामी जी ने कहा कि मैंने योग में कुछ नया नहीं किया, बल्कि प्रयोग किया और उसके परिणाम सामने आते गये जो प्रमाण हो गये। तनाव को सभी बीमारियों का कारण बताते हुए स्वामी रामदेव ने बताया कि एसजीपीजीआई लखनऊ केसाथ मिलकर उन्होंने शोध किया। नौ दिनों तक चले इस शोध में पाया गया कि योग से तनाव पैदा करने वाले हारमोन्स खत्म हो गये।
एड्स, इनफर्टिलिटी और अन्य बीमारियों की चर्चा करते हुए स्वामी जी ने कहा कि सात प्राणायाम शरीर के सभी अंगों को गतिशील करने में सहायक होते हैं। जब यह अंग पूरी क्षमता के साथ काम करने लगते हैं तो स्वस्थ शरीर का विकास होता है। स्वामी जी ने कहा कि पातांजलि योग पीठ में शोध के सभी संसाधन उपलब्ध कराये जा रहे हैं और उसके बाद भारतीय बच्चों को शोध के लिये विदेश नहीं जाना पडे़गा। विज्ञान का तिरस्कार नहीं बल्कि उसका सत्कार करना चाहिए। विरोध के स्वर भूलकर संवाद, समन्वय और समाधान की ओर आगे बढ़ना चाहिए। आरोग्य मानव मात्र का मौलिक अधिकार है और वह योग के माध्यम से पाया जा सकता है। भारत को विश्व शक्ति बनाने की दिशा में मेरी मुहिम जारी है, जिसमें सफलता मिल रही है। करोड़ों लोग सुबह पांच बजे उठकर बीमारी के खिलाफ जंग लड़ रहे है।
इससे पूर्व स्वामी रामदेव ने रुहेलखंड मेडिकल कालेज का उद्घाटन किया। कालेज के चेयरमैन डा. केशव कुमार ने कहा कि स्वामी जी के आगमन ने कालेज के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है। प्राचार्य डा. कशमीर सिंह ने बताया कि डेंटल कालेज का पहला बैच इसी साल पास-आउट हुआ है। अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने भी विचार रखे। भारतीय दंत चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डा. अनिल कोहली, डा. किरन अग्रवाल, डा. लता अग्रवाल, सर्वेश अग्रवाल, गौरव अग्रवाल, कुलपति ओम प्रकाश आदि ने स्वामी जी का स्वागत किया। साभार
जागरण पोर्टल.

No comments: