Mar 25, 02:31 am
बरेली। गेहूं खरीद में निजी क्षेत्र की कम्पनियों का मुकाबला करने की तैयारी कर रही सरकारी एजेंसियों को इस बार मंडल से सात लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य दिया गया है। इस बार फसल अच्छी होने की सम्भावना और समर्थन मूल्य में की गयी बढ़ोत्तरी के चलते खरीद का ये आंकड़ा पूरा होने की उम्मीद तो की जा रही है, मगर इसके साथ ही अधिकारियों की परेशानियां भी बढ़ गयी हैं। दरअसल खरीद के लिये दिया गया लक्ष्य यहां की भंडारण क्षमता से काफी अधिक है। अब अधिकारी इस सीजन में खरीदे जाने वाले गेहूं का सुरक्षित रखने के लिये गोदामों और खुले गोदाम बनाने को स्थान की तलाश मे लगे हैं।
इस सीजन में गेहूं की अच्छी पैदावार की उम्मीद के साथ सरकारी एजेंसियों ने इसकी बढ़े स्तर पर खरीद कराने की तैयारी की है। केंद्र सरकार ने इसके लिये एक हजार रुपये प्रति कुंतल का समर्थन मूल्य काफी पहले ही घोषित कर दिया था। अब प्रदेश शासन ने यहां सरकारी संस्थाओं के सहयोग के साथ ही आढ़तियों से भी गेहूं की खरीद कराने की नीति घोषित की है। इन तैयारियों के बीच मंडल के अधिकारी यहां खरीदे जाने वाले गेहूं को रखने की समस्या को लेकर परेशान हैं। इनकी समझ में नही आ रहा मंडल के चार जिलों से खरीदा जाने वाला सात कुंतल से अधिक गेहूं आखिर रखा कहां जायेगा।
यहां बता दे कि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मंडल भर में सरकारी एजेंसियों के पास लगभग साढ़े पांच लाख एमटी की भंडारण क्षमता है। इसमें पिछले माह तक चली धान की खरीद से तैयार कराया गया चावल और पीडीएस के लिये गेहूं का रिजर्व स्टाक रखा है। आधिकारिक सूचना के अनुसार मंडल के चारो जिलों में इस समय लगभग चार लाख एमटी गेहूं चावल रखा है।
अधिकारियों का मानना है कि गेहूं की खरीद के साथ साथ यहां चार लाख एमटी गेहूं रखने की जुगाड़ तो हो जायेगी। इससे अधिक होने वाली खरीद के लिये अतिरिक्त गोदामों की जरूरत पड़ेगी। इस समस्या के बारे में आरएफसी तपेंद्र प्रसाद बताते हैं, जरूरत पड़ने पर गेहूं रखने को खुले स्थानों पर अस्थाई गोदामों की व्यवस्था भी करायी जायेगी। इसके लिये सभी जनपदों में अधिकारियों को उपयुक्त स्थान चिंहित करने के निर्देश दिये गये हैं। साभार जागरण पोर्टल
Tuesday, March 25, 2008
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