Tuesday, March 25, 2008

बरेली कालेज में नकल रैकेट को लेकर खेमेबंदी शुरू

Mar 24, 02:53 am
बरेली। बरेली कालेज में दस मार्च को कापी बदलते हुए पकड़े गये छात्र के खिलाफ काफी सबूत मिलने के बाद भी जांच कमेटी किसी नतीजे तक नहीं पहुंच पा रही है। प्राचार्य अब कमेटी को छात्र के कोचिंग सेंटर व परीक्षा के दिन उसके कक्ष में आने-जाने वाले सभी कर्मचारियों व शिक्षकों से पूछताछ करने को कहा है।
बरेली कालेज में बीएससी द्वितीय वर्ष के एक छात्र को केमिस्ट्री की परीक्षा में कापी बदलते हुए पकड़ा गया था। छात्र के पास जो कापी मिली वह पिछले साल की थी। काफी देर तक पूछताछ करने के बाद भी उसने कालेज प्रशासन को यह नहीं बताया कि असली कापी कहां है। इसके बाद कालेज ने उसे पुलिस को सौंप दिया। 13 मार्च को छात्र केमिस्ट्री की दूसरी परीक्षा देने आया था। चेकिंग के दौरान पकड़ी गई कापी से लेख का मिलान नहीं हुआ। इससे यह बात साफ हो गई कि कापी छात्र ने नहीं लिखी थी। मामले की जांच कर रहे डा. दीपक आनंद को इस मामले में कुछ और महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। प्राचार्य डा. आरपी सिंह ने बताया: हम मामले का जल्द ही खुलासा कर देंगे। मैंने जांच टीम को छात्र के कोचिंग सेंटरों की जांच करने को कहा है। हम इस बात की जांच भी कर रहे हैं कि दस मार्च को उसके कमरे में कौन-कौन से कर्मचारी और शिक्षक आये व कितनी बार। कालेज के दोनों गेटों पर जो सख्ती है उसे देखते हुए कापी को कैंपस से बाहर ले जाकर हल करना संभव नहीं है ऐसे में कैंपस में बैठकर किसने कापी पर सवाल हल किये? उसे पिछले साल की कापी किसने मुहैया कराई? केमिस्ट्री का पेपर साल्वर तक कैसे पहुंचा? कापी व पेपर बाहर पहुंचाने वाले छात्र को कक्ष निरीक्षक क्यों नहीं पकड़ सके? कक्षा में जब निर्धारित कापियां ही बांटी जाती हैं तो फिर अतिरिक्त कापी पहले साल्वर और फिर छात्र तक कैसे पहुंच गई? जांच अधिकारी को अभी इन तमाम सवालों के जवाब तलाशने हैं। इधर खबर है कि इस मामले को लेकर कालेज में खेमेबंदी चल रही है। दो गुटों में बंटे कर्मचारी एक दूसरे पर कोई भी आरोप लगाने से नहीं चूक रहे हैं। साभार जागरण पोर्टल

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