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Monday, October 23, 2017

स्वतंत्रता संग्राम और बरेली

बरेली में आला हजरत के नाम से मशहूर अहमद रज़ा खां साहब के सगे दादा मौलाना रज़ा अली खां बरेलवी (1809 से 1869) ने बरेली में अंग्रेज़ो के खिलाफ न सिर्फ माहौल तैयार किया बल्कि अंग्रेज़ो को नाकों चने चबाए। मौलाना रज़ा अली खां साहब एक जंगजू सिपाही की तरह अंग्रेज़ो के खिलाफ तन मन धन से लड़े। तत्कालीन लार्ड हेस्टिंग्स आप के सख्त खिलाफ था। जनरल हडसन ने आप को गिरफ्तार करने के लिए 500 रुपये इनाम भी घोषित किया था लेकिन वो कभी अपने मकसद में कामयाब न हो सका। आप 1857 में जनरल बख्त खां की बरेली की जेहादी यूनिट के संरक्षक थे। हाफिज रहमत खां आप के सुझावों पर अमल करते थे।
जब 1857 में जेहाद का फतवा दिया गया तो बरेली से आप ने उस फतवे का समर्थन किया और अंग्रेज़ो के सफाये का ऐलान किया।
बरेली के धार्मिक विद्वानों का आज़ादी की लड़ाई में विशेष स्थान है।
©रबीअ बहार